शुक्रवार, 16 जनवरी 2015

गाँव से दूर गर नहीं आता,
दौर गर्दिश का भी नहीं आता!!
पहले हर पल जो साथ रहता था,
ख्व़ाब में भी नज़र नहीं आता!!
वक़्त ने वक़्त वो दिखाया है,
साथ साया तलक नहीं आता!!
आप दुनियाँ की बात करते हो,
आईने तक को मैं नहीं भाता!
दौर ग़र्दिश का जब से आया है, 
चाँद भी छत तलक नहीं आता!!

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