लोकतंत्र
की
सबसे
बड़ी इकाई के
जन
मानस के स्वाभिमान को
सत्ताधीशों
ने,
अपने
हित की खातिर
दुनियाँ
के तथाकथित
आका
के,
चरणों
में अर्पित कर डाला!
अपनी
बदहाली पे
आँसू
बहा रही है,
भारत
माता!
कल
तक
जिनको
गरियाते-गरियाते
पेट
नहीं भरता था
आज
उन्हीं
के आगे
नतमस्तक
हैं,
भारत
भाग्य विधाता!
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