मंगलवार, 20 जनवरी 2015



वक्त ने वक्त वो दिखाया है,
रहनुमा तक ना साथ आया है!  
 एक अदद नौकरी की चाहत ने,
दर बदर पर उसे घुमाया है!
काम हासिल नहीं हुआ शायद,
आज वो फिर उदास आया है!
आज फिर बहन ने तसल्ली दी,
पिता ने हौसला बढ़ाया है!
आज फिर माँ ने जेब देखी है,
कहीँ सलफास तो ना लाया है!

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