सोमवार, 16 फ़रवरी 2015

आदमी में आदमियत की कमी खलती रही,
ज़िन्दगानी का सफ़र बाकी तो गुल गुलशन रहा!! 

मेरी भी मजबूरी है!
सच लिखना बहुत जरूरी है!!
जितनी चादर हो केवल
उतना विस्तार जरूरी है!!
हो आलम जब नादारी का 
गम़गुस्सार जरूरी है!
इतिबार जरूरी है लेकिन,
पहले इकरार जरूरी है !!




शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2015

मुझको भी तो लिफ्ट करा दे !!

बाबा राम रहीम द्वारा बीजेपी को समर्थन करने के पीछे जो असली मकसद है वह किसी से छुपा नहीं है, जिस प्रकार बाबा रामदेव ​ ने अपने साम्राज्य को बचाने के लिएनरेंदर मोदी ​ का समर्थन किया था, ठीक उसी  प्रकार अब बाबा राम रहीम भी अपनी विवादित फ़िल्म 'मेसेंजर ऑफ गॉड' को रिलीज कराने के लिए बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं!
ज्ञात हो 'मेसेंजर ऑफ गॉड' बाबा राम रहीम द्वारा स्वनिर्मित वह फ़िल्म है, जिसके प्रदर्शन लेकर पंजाब में  बीजेपी की मुख्य सहयोगी पार्टी 'अकाली दल' उग्र विरोध जता चुकी है! वह फ़िल्म  जिसकी वजह से सेंसर बोर्ड के तमाम सदस्यों ने सरकार पर बोर्ड के काम में दखलंदाजी का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दिया था और  जिसकी बदौलत लोकसभा चुनाव में 'हर हर मोदी' का नारा देने वाले पहलाज निहलानी को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के पद पर नियुक्त कर मोदी जी को  उनका तथाकथित क़र्ज़ उतारने का सौभाग्य प्राप्त हुआ!
खैर जो भी हो, जहाँ  बाबा रामदेव ने बीजेपी का समर्थन करके अपने साम्राज्य के साथ साथ अपने लिए भी Z प्लस स्तर की सुरक्षा श्रेणी प्राप्त कर ली, वही निहलानी जी ने सेंसर बोर्ड की अध्यक्षता, इसी श्रृंखला में अब अगला  नम्बर बाबा राम रहीम को अपनी फ़िल्म के प्रदर्शन की अनुमति मिलने का है!
आज दिल्ली विधानसभा की इस पूर्व संध्या पर काश  'बापू आसाराम' और 'रामपाल बाबा' भी अपने समर्थकों से बीजेपी के पक्ष में मतदान करने की अपील जारी कर देते तो शायद, उन्हें भी जमानत मिल ही जाती!
बाकी सब तो ठीक है लेकिन मेरी व्यक्तिगत शिकायत ये है,  कैसे भगवान हो जो अपने भक्तों के  सामने आये दिन एक नई समस्या खड़ी कर देते हो! अब परसों तक जो भक्त जिन 'बाबा जी' को अपनी  गलियों से नवाजते थे, अब  उन्ही बाबाजी के ठुल्लू के आगे नतमस्तक होने को विवश और  आतुर दिख रहे हैं!  


सोमवार, 2 फ़रवरी 2015


मेरे आँगन में अभी एक शज़र पुराना है!
उसी के वास्ते घर लौट करके जाना है!!
मेरा वज़ूद नापने चला है वो सूरज,
शाम ढलते ही जिसे फिर से डूब जाना है!!
मुझको उम्मीद है आखीर में दगा देंगे,
मैंने जिनको भी यहाँ हमनशीन माना है!!
जब तलक़ जान है पंखों में उसको उड़ने दो,
रात होते ही परिंदों को लौट आना है!!  
खायेगा ठोकरें तो खुद ही संभल जायेगा,
नशा एक रोज़ खुद-ब-खुद ही उतर जाना है!!
अपनी चाहत पे भरोसा यूँ ही कायम रखिये,
उसको आखिर में एक रोज़ लौट आना है!!

शनिवार, 31 जनवरी 2015

नैतिकता के नये मायने



आज एक अरसे बाद अपने स्नेहिल साथी और बाबा रामदेव जी द्वारा युवाओं को भ्रम में बनाये रखने के लिये चलाये जा रहे संगठन ‘युवा भारत’ के गाज़ियाबाद जनपद के जिलाप्रभारी भाई शुभम जी से बात हुई!
ज्ञात हुआ मोदी जी से देश को अब तक भले ही बाबाजी का ठुल्लू भी ना मिला हो, लेकिन बाबा जी को जरूर जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिल गई है! खैर इसमें नया तो कुछ नहीं है ये सब तो होना ही था आज नहीं तो कल! लेकिन मुझे आश्चर्य इस बात का है, एक तथाकथित सन्यासी को इतनी सुरक्षा की आवश्यकता की जरूरत क्यों आन पड़ी, और वो भी उस स्थिति में जब केंद्र में तथाकथित रामराज्य अर्थात् उनके ही शिष्य का शासन लागू हो चुका है! वैसे शिकायत मुझे मोदीजी से भी है कि, जो काम मात्र एक जोड़ी सूट सलवार से हो सकता था, उसके लिए सुरक्षाकर्मियों की इतनी लम्बी चौड़ी जमात बाबाजी के पीछे लगाने की क्या जरूरत थी! अगर आप अपने लिये नौ लाख का सूट सिलवा सकते हैं तो, तो एक सलवार बाबाजी के लिए भी सिलवा देते, बेशक़ टेरालीन या फिर लट्ठे की ही सही!
ज्ञात हो कि भाई के साथ मेरे प्रगाढ़ सम्बन्ध उस समय से हैं, जब मैं अपने पतंजलि कार्यकाल के दौरान इनके जिले में सेवारत था, और एक रोज रात को फेसबुक पर गलती से इन्हें वह सन्देश भेज दिया था, जिसे मैं अपनी एक महिला मित्र को भेजने जा रहा था, और जिसकी शिकायत इन्होने दिन निकलते ही संगठन के मुख्य प्रभारी से की थी!  शायद इन्हें हज़म नहीं हुआ होगा कि बाबाजी के संगठन का कोई व्यक्ति गर्लफ्रेंड कैसे रख सकता है, और वो भी शादीशुदा होते हुए! वो बात अलग है कि यह बात संगठन के दिल्ली मुख्यालय से लेकर हरिद्वार मुख्यालय तक सबको पहले से ही पता थी!
पता नहीं क्यों सब लोग शादीशुदा व्यक्ति से प्रेम करने का अधिकार छीनना चाहते हैं, अभी कल ही व्हाट्स अप पर एक और महिला मित्र कह रही थी, शादीशुदा होकर गर्लफ्रेंड रखते हो, मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी, अपनी बीवी का नम्बर दो, अभी उसे बोलती हूँ!
खैर नम्बर तो मैंने नहीं दिया, और देने का फायदा भी नहीं था, क्यूंकि ना तो वो अपने पति के सामने मुझसे बात करती है, और ना ही मैं अपनी पत्नी के सामने उससे!
 

सोमवार, 26 जनवरी 2015

भारत भाग्य विधाता!

लोकतंत्र की
सबसे बड़ी इकाई के
जन मानस के स्वाभिमान को
सत्ताधीशों ने,
अपने हित की खातिर  
दुनियाँ के तथाकथित
आका के,
चरणों में अर्पित कर डाला!
अपनी बदहाली पे
आँसू बहा रही है,
भारत माता!
कल तक
जिनको गरियाते-गरियाते
पेट नहीं भरता था
आज
उन्हीं के आगे
नतमस्तक हैं,
भारत भाग्य विधाता!

शनिवार, 24 जनवरी 2015

बसंत

कितना मनभावन
और पावन है,
यह बसंत!
यौवन की पगडण्डी पर
पहला पग धरने वाले
प्रेमी युगलों से पूँछो!
कितना निष्ठुर,
कितना निर्मम है,
यह बसंत!
यह जाकर पूछो!
उदारक्षुधा से व्याकुल होकर,
प्राण त्यागते
भूमिपुत्र से!