एक जोकर का पंचनामा..!
"गर जानना है मुझको तो, आँखों में झाँकिये., शब्दों में बयाँ हो सकूँ, वो चीज़ नहीं मैं..!!"
सोमवार, 16 फ़रवरी 2015
मेरी भी मजबूरी है
!
सच लिखना बहुत जरूरी है
!!
जितनी चादर हो केवल
उतना विस्तार जरूरी है!!
हो आलम जब नादारी का
गम़गुस्सार जरूरी है
!
!
इतिबार जरूरी है लेकिन,
पहले इकरार जरूरी है !!
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