सोमवार, 16 फ़रवरी 2015

मेरी भी मजबूरी है!
सच लिखना बहुत जरूरी है!!
जितनी चादर हो केवल
उतना विस्तार जरूरी है!!
हो आलम जब नादारी का 
गम़गुस्सार जरूरी है!
इतिबार जरूरी है लेकिन,
पहले इकरार जरूरी है !!




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