शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2015

मुझको भी तो लिफ्ट करा दे !!

बाबा राम रहीम द्वारा बीजेपी को समर्थन करने के पीछे जो असली मकसद है वह किसी से छुपा नहीं है, जिस प्रकार बाबा रामदेव ​ ने अपने साम्राज्य को बचाने के लिएनरेंदर मोदी ​ का समर्थन किया था, ठीक उसी  प्रकार अब बाबा राम रहीम भी अपनी विवादित फ़िल्म 'मेसेंजर ऑफ गॉड' को रिलीज कराने के लिए बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं!
ज्ञात हो 'मेसेंजर ऑफ गॉड' बाबा राम रहीम द्वारा स्वनिर्मित वह फ़िल्म है, जिसके प्रदर्शन लेकर पंजाब में  बीजेपी की मुख्य सहयोगी पार्टी 'अकाली दल' उग्र विरोध जता चुकी है! वह फ़िल्म  जिसकी वजह से सेंसर बोर्ड के तमाम सदस्यों ने सरकार पर बोर्ड के काम में दखलंदाजी का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दिया था और  जिसकी बदौलत लोकसभा चुनाव में 'हर हर मोदी' का नारा देने वाले पहलाज निहलानी को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के पद पर नियुक्त कर मोदी जी को  उनका तथाकथित क़र्ज़ उतारने का सौभाग्य प्राप्त हुआ!
खैर जो भी हो, जहाँ  बाबा रामदेव ने बीजेपी का समर्थन करके अपने साम्राज्य के साथ साथ अपने लिए भी Z प्लस स्तर की सुरक्षा श्रेणी प्राप्त कर ली, वही निहलानी जी ने सेंसर बोर्ड की अध्यक्षता, इसी श्रृंखला में अब अगला  नम्बर बाबा राम रहीम को अपनी फ़िल्म के प्रदर्शन की अनुमति मिलने का है!
आज दिल्ली विधानसभा की इस पूर्व संध्या पर काश  'बापू आसाराम' और 'रामपाल बाबा' भी अपने समर्थकों से बीजेपी के पक्ष में मतदान करने की अपील जारी कर देते तो शायद, उन्हें भी जमानत मिल ही जाती!
बाकी सब तो ठीक है लेकिन मेरी व्यक्तिगत शिकायत ये है,  कैसे भगवान हो जो अपने भक्तों के  सामने आये दिन एक नई समस्या खड़ी कर देते हो! अब परसों तक जो भक्त जिन 'बाबा जी' को अपनी  गलियों से नवाजते थे, अब  उन्ही बाबाजी के ठुल्लू के आगे नतमस्तक होने को विवश और  आतुर दिख रहे हैं!  


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