मेरे
आँगन में अभी एक शज़र पुराना है!
उसी के वास्ते घर लौट करके
जाना है!!
मेरा
वज़ूद नापने चला है वो सूरज,
शाम
ढलते ही जिसे फिर से डूब जाना है!!
मुझको उम्मीद है आखीर में
दगा देंगे,
मैंने जिनको भी यहाँ हमनशीन
माना है!!
जब तलक़ जान है पंखों में
उसको उड़ने दो,
रात होते ही परिंदों को लौट
आना है!!
खायेगा
ठोकरें तो खुद ही संभल जायेगा,
नशा
एक रोज़ खुद-ब-खुद ही उतर जाना है!!
अपनी चाहत पे भरोसा यूँ ही
कायम रखिये,
उसको आखिर में एक रोज़ लौट
आना है!!

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